आत्मकथा भाग-4 अंश-45

छोटे अग्रवाल साहब

मैं छोटे अग्रवाल साहब श्री नवल किशोर अग्रवाल का उल्लेख ऊपर कई बार कर चुका हूँ। वे और भाभीजी हमसे बहुत स्नेह रखते हैं। वे दोनों नित्य योग करने आते थे और जब तक उस बिल्डिंग में रहे, तब तक उन्होंने एक बार भी योग नहीं छोड़ा। बड़े अग्रवाल साहब के रिटायरमेंट के कुछ महीने बाद उन्होंने भी मुख्य प्रबंधक पद पर रहते हुए अवकाश प्राप्त कर लिया। उन्होंने नवी मुम्बई के निकट ही डाम्बीवली क्षेत्र में पलावा मौहल्ले में एक फ्लैट खरीद लिया था। अवकाश प्राप्ति के बाद उन्होंने उसका गृह प्रवेश किया, जिसमें हम सपरिवार सम्मिलित हुए थे। उसके बाद वे वहीं शिफ्ट हो गये।
उन्होंने जिस कालोनी में फ्लैट लिया था, वह एक छोटी सी नदी के किनारे बहुत सुन्दर जगह है। उनकी कालोनी पूरी तरह यूरोपीय कालोनियों की तरह बसायी गयी है। लगभग सभी सुविधायें वहाँ उपलब्ध हैं, जैसे- स्विमिंग पूल, पुस्तकालय, जिम, खेल-कूद के स्थान, स्कूल, मन्दिर, अस्पताल, पार्क, होटल, रेस्टोरेंट, सभी वस्तुओं की दुकानें आदि। वहाँ की सड़कें बहुत चौड़ी और पूरी तरह व्यवस्थित हैं। गन्दगी नाममात्र को भी नहीं। सभी लोग ट्रैफिक के नियमों का पालन करते हैं।
वहाँ से मुख्य रोड तक आने जाने के लिए फ्री बस सेवायें लगातार चलती रहती हैं, हालांकि यह दूरी मुश्किल से दो किमी है। कालोनी काफी बड़ी है, पूरा शहर जैसी लगती है। बसें यात्रियों को कई स्थानों से चढ़ाती और उतारती हैं। इन बसों में वहाँ के निवासियों के अलावा केवल उनके अतिथियों को जाने की अनुमति है, यदि कोई निवासी उनके साथ हो। इसलिए हमें वहाँ जाने में कभी कोई कष्ट नहीं होता था और हम सरलता से वहाँ पहुँच जाते थे। हमने कई बार उसका भ्रमण किया था और कई बार तो रात को भी वहीं रुके थे। वह जगह इतनी आनन्ददायक और आरामदायक है कि मन करता था कि मैं भी यहीं फ्लैट ले लूँ और शान्ति से यहीं रहकर शेष जिन्दगी बिता लूँ।
महाबलेश्वर यात्रा
जब छोटे अग्रवाल साहब अवकाश प्राप्त करने वाले थे, तो उससे कुछ दिन पूर्व हमारा विचार महाबलेश्वर की यात्रा करने का बन गया, जो एक पहाड़ी स्थान और तीर्थस्थल भी है। इसके लिए हमने एक पैकेज बुक कराया, जिसमें बस से आने-जाने के अलावा होटल में ठहरने और तीनों समय भोजन करना भी शामिल था। आस-पास के स्थान देखने की व्यवस्था हमें स्वयं ही करनी थी।
हमारी यह यात्रा बहुत आनन्ददायक रही। उस समय काफी ठंड पड़ रही थी, लेकिन दोपहर को धूप निकल रही थी, इसलिए घूमने में कोई कष्ट नहीं हुआ। वहाँ एक ऐसा मन्दिर है, जिसमें पाँच नदियों का पानी आता है। यह काल्पनिक नहीं है, बल्कि वास्तव में वहाँ किसी तरह पाइपों द्वारा पाँच नदियों का पानी पहुँचाया जाता है। वह काफी ठंडा और बहुत ही मीठा होता है। हमने भी उसे पीकर देखा था। वहाँ कुंड में स्नान करने की भी अनुमति है, पर हमने स्नान नहीं किया।
वहाँ एक गणेश मन्दिर भी है, जिसके निकट एक बहुत ऊँची पहाड़ी और जंगल है। जंगल में होकर जाकर उस पहाड़ी पर चढ़ा जाता है। हमने भी काफी समय उस पहाड़ी पर बिताया था। महाबलेश्वर स्ट्रौबेरी की खेती के लिए प्रसिद्ध है। हमने भी इसके खेत देखे थे और कुछ खरीदारी भी की थी। वहाँ कई तरह की टाफियाँ और मुरब्बे आदि मिलते हैं, जो बहुत अच्छे होते हैं।
वहाँ एक दुकान पर हम कुछ खरीदारी करने के लिए गये। वहाँ लगे एक बोर्ड से पता चला कि उस दुकान की मालकिन महाबलेश्वर की नगरपालिका अध्यक्ष हैं। वे दुकान पर ही थीं। मैंने उनसे नमस्कार करके पूछा कि आप किस पार्टी से जीती हैं, तो उन्होंने कहा- एनसीपी (यानी शरद पंवार की पार्टी)। यह जानकर मुझे आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि वह घोर कोंकण क्षेत्र है और उस शहर में मुसलमानों की भी बड़ी संख्या है।
छोटे अग्रवाल भाईसाहब से हमारा सम्पर्क आज भी बना हुआ है और हम नियमित उनसे बातें करते रहते हैं। वे एक बार लखनऊ किसी शादी में आये थे, तो दो दिन हमारे पास भी रहे थे और फिर हमारे पुत्र के विवाह में आगरा भी पधारे थे।
-- डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’

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