आत्मकथा भाग-4 अंश-33
श्री भीम प्रसाद
ऊपर मैं एक से अधिक बार श्री भीम प्रसाद का उल्लेख कर चुका हूँ। यहाँ मैं उनका विस्तृत परिचय देना आवश्यक समझता हूँ, क्योंकि वे नवी मुम्बई में न केवल लम्बे समय तक मेरे सहयोगी रहे, बल्कि घनिष्ठ मित्र भी थे और आज भी हैं।
श्री भीम प्रसाद मूलतः मैसूर के रहने वाले हैं और उनका परिवार उस क्षेत्र के प्रतिष्ठित परिवारों में से एक है। इसका कारण यह है कि उनके परिवार में बहुत से लोग राजनीति में सक्रिय रहे हैं, अधिकांश देवगौड़ा की पार्टी में और कुछ कांग्रेस में। केवल भीम प्रसाद जी ही इंजीनियरिंग में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद बैंक सेवा में हैं। वे कम उम्र में ही मुख्य प्रबंधक के पद तक पहुँच गये थे। पर संयोग से अभी तक उसी पद पर हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि हमारे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनके सहपाठी और घनिष्ठ मित्र रहे हैं।
वे मेरे भतीजे डाॅ मुकेश चन्द्र की तरह रामचन्द्र मिशन के अनुयायी हैं अर्थात् सहज मार्गी हैं। वे इस पद्धति के अनुसार नित्य एक घंटे ध्यान करते हैं। मुझे इसका पता तब लगा जब मैंने उनकी कार में मिशन के तत्कालीन प्रमुख चारी जी का चित्र लगा हुआ देखा। उनकी पत्नी श्रीमती विवेका पाठक प्रसाद मूलतः अलीगढ़ की रहने वाली हैं, परन्तु बचपन से ही मुम्बई में रह रही हैं। वे एक प्राइवेट चैनल में उद्घोषिका (एंकर) का कार्य भी कर चुकी हैं। वे भी पहले से रामचन्द्र मिशन की सदस्या हैं। वास्तव में श्री भीम प्रसाद और उनका विवाह बहुत सादे समारोह में चारी जी ने ही कराया था। दोनों की दो सुन्दर और योग्य पुत्रियाँ हैं- लता और दिव्या। इनमें से बड़ी पुत्री लता कभी-कभी मेरी योग कक्षा में आया करती थी।
प्रारम्भ में मैं भीम प्रसाद जी के साथ ही कार्यालय आता जाता था। उनके पास हुंडई की वेरना माॅडल की कार है, जो बहुत अच्छी है। उसमें बीएमडब्ल्यू कार के लगभग सभी फीचर हैं। वे अपनी कार की देखभाल में हर साल बहुत व्यय करते हैं और उसे एकदम नयी जैसी बनाये रखते हैं। वास्तव में वे उस कार के प्रति एक प्रकार से दीवाने हैं। कारों का उनका ज्ञान बहुत विस्तृत है। वे किसी भी कार को दूर से देखकर उसका नाम और माॅडल ही नहीं, बल्कि मूल्य और विशेषतायें भी बता देते हैं।
उनका स्वास्थ्य भी अन्य की तुलना में बहुत अच्छा है। प्रारम्भ में उनको गैस बनने और डकार अधिक आने की शिकायतें थीं, लेकिन मेरे साथ नित्य योग करने और कुछ सुझावों का पालन करने से उनकी शिकायतें लगभग समाप्त हो गयीं। एक बार हम दोनों ने अपने स्वास्थ्य को सुधारने के लिए 10 दिन का काया-कल्प कार्यक्रम भी किया था, जिससे दोनों को बहुत लाभ हुआ था।
उनकी पत्नी श्रीमती विवेका हर प्रकार का भोजन बनाने में प्रवीण हैं। कई बार वे नाश्ते में दक्षिण भारतीय भोजन इडली, साँभर-वड़ा या डोसा बनाया करती थीं, तो कभी-कभी मुझे भी खिलाती थीं। श्री भीम प्रसाद ने ही मुझे बताया था कि जिसको हम ‘डोसा’ कहते हैं, उसका सही उच्चारण ‘दोसे’ है। उन सबका रहन-सहन बहुत ही सात्विक है। दोनों सहज मार्ग की पद्धति से नित्य ध्यान का अभ्यास करते हैं और अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहते हैं।
वे जब भी मुम्बई में होते हैं, तो हर रविवार को रामचन्द्र मिशन के मुम्बई मुख्यालय में पनवेल अवश्य जाते हैं, जो नवी मुम्बई में ही है और हमारे परिसर से वहाँ तक जाने में कम से कम एक घंटा लगता है। एक बार एक रविवार को मैं भी उनके साथ गया था और वहाँ एक घंटे तक ध्यान किया था। वहाँ का अनुशासन बहुत अच्छा था। वहाँ एक बड़ा हाॅल है, जिसमें एक साथ 500 लोग कुर्सियों पर बैठकर ध्यान कर सकते हैं।
मैं कई बार उनके साथ इधर-उधर घूमने गया था। एक बार तो मैंने उनके परिवार के साथ एक सर्कस भी देखा था, जो वाशी से कुछ दूर एक जगह लगा था। तब उनके बच्चों ने पहली बार सर्कस देखा था।
मेरे नवी मुम्बई पहुँचने के कुछ माह बाद ही श्री भीम प्रसाद का स्थानांतरण नागपुर के पास एक शहर में हो गया था, परन्तु उनका परिवार वहीं रहा। फिर लगभग डेढ़ साल बाद वे पुनः स्थानांतरित होकर मुम्बई आये, लेकिन उनकी पदस्थापना मुम्बई मंडलीय कार्यालय में की गयी थी, जो वरली में है। वे प्रतिदिन कोपरखैरणे से मुम्बई जाते थे। इससे उन्हें योग करने का समय नहीं मिल पाता था और बहुत थक भी जाते थे।
इस समय वे मुम्बई की किसी शाखा में शाखा प्रबंधक के रूप में सेवा कर रहे हैं। रहते अभी भी उसी फ्लैट में हैं। उन्होंने अपने फ्लैट की बालकनी में छोटा-सा बहुत सुन्दर उद्यान बना रखा है, जिसके चित्र वे फेसबुक पर पोस्ट करते रहते हैं। मेरा उनसे सम्पर्क बना हुआ है।
-- डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’
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