आत्मकथा भाग-4 अंश-24

श्री आर.के. श्रीवास्तव से भेंट

श्री संजय मेहता, श्री हरमिन्दर सिंह और श्री रवि आनन्द मेरे एचएएल के समय के पुराने साथी हैं। इन सबका उल्लेख मैं आत्मकथा के दूसरे भाग में विस्तार से कर चुका हूँ। पहले वे एक कम्पनी में काम करने दुबई चले गये थे, फिर वहाँ अपना काण्ट्रैक्ट पूरा करके अमेरिका चले गये। तब से वहीं पर हैं और वहाँ की नागरिकता ले रखी है। श्री हरमिन्दर सिंह एवं रवि आनन्द मूल रूप में लखनऊ के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता और भाई-बहिन लखनऊ में ही रहते हैं, जिनसे मिलने वे हर साल आते रहते हैं। लेकिन मेरा उनसे कोई सम्पर्क नहीं था, क्योंकि मैं स्वयं ही 21 साल तक लखनऊ से बाहर रहा।
इस बार फिर से लखनऊ में निवास करने का अवसर मिला तो एचएएल के हमारे साथी श्री विष्णु कुमार ने बताया कि श्री हरमिन्दर सिंह से उनका सम्पर्क है। उन्होंने मुझे उनका मोबाइल नंबर भी दिया। मैंने उस नम्बर पर संदेश भेजकर श्री हरमिन्दर सिंह से सम्पर्क किया। सौभाग्य से उनसे सम्पर्क स्थापित हो गया और उनके माध्यम से सर्वश्री आर.के. श्रीवास्तव, श्री संजय मेहता एवं श्री रवि आनन्द से भी सम्पर्क हुआ। इन सब पुराने बड़े भाई जैसे साथियों से लम्बे समय बाद पुनः सम्पर्क होने पर मेरी प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था। यह सन् 2012 की बात है, जब हम बैंक द्वारा दिये गये फ्लैट में निवास कर रहे थे।
मुझे पता चला कि श्री आर.के. श्रीवास्तव उस समय एक ऊँचे पद पर सिडबी (SIDBI) बैंक में लखनऊ में ही सेवा कर रहे हैं। उनका निवास भी सिविल लाइन्स क्षेत्र में लाल बहादुर शास्त्री मार्ग पर उस बैंक के एक फ्लैट में था। यह स्थान मेरे तत्कालीन निवास से मुश्किल से आधा किमी दूर है। इसलिए एक दिन सायंकाल समय तय करके मैं उनसे मिलने गया। उनका फ्लैट आसानी से मिल गया।
अभिवादन के बाद उनके फ्लैट में घुसते ही मैं इधर-उधर देखने लगा और पूछा- ‘प्रूडी कहाँ है?’ यह सुनकर उनको हँसी आ गयी। कहने लगे- ‘अब वह बच्ची नहीं है। उसकी शादी हो गयी है और मैं नाना बन गया हूँ।’ यह जानकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई और मैंने उनको बधाई दी। पूछने पर उन्होंने बताया कि वह अर्थात् प्रूडी अमेरिका में है और वे भी बीच-बीच में वहाँ जाते रहते हैं। यह भी पता चला कि उनकी दूसरी बेटी भी अमेरिका में है और वह वहीं रहकर पढ़ रही है। पुरानी यादें ताजा करके मुझे बहुत प्रसन्नता हुई।
मैं अपने साथ अपनी ‘स्वास्थ्य रहस्य’ पुस्तिका की एक प्रति उनके लिए ले गया था। मैंने उनसे कहा कि यदि स्वास्थ्य सम्बंधी कोई समस्या हो, तो मुझे बताइए। उन्होंने बताया कि उनकी पीठ में बहुत दर्द होता है जो किसी तरह नहीं जा रहा है। बहुत दवाइयाँ खा चुके हैं और टहलने भी जाते हैं। मैंने उनको बताया कि यह दर्द केवल टहलने से नहीं जाएगा, बल्कि उचित व्यायाम करने से चला जाएगा। मैंने उनको अन्य व्यायामों के साथ रीढ़ के व्यायाम क्वीन और किंग एक्सरसाइज रोज दो बार करने की सलाह दी और वे व्यायाम करके भी दिखाए। काफी देर बातें करने के बाद फिर मैं सम्पर्क में रहने का वायदा करके चला आया।
मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि उन व्यायामों से उनका पीठ का दर्द बिल्कुल ठीक हो गया। आगे भी वे मुझसे स्वास्थ्य सम्बंधी सलाह लेते रहते हैं और प्रायः स्वस्थ बने रहते हैं। आजकल वे नवी मुम्बई में रहते हैं। मैं वहाँ भी उनसे मिल चुका हूँ। इसकी चर्चा आगे करूँगा।
पुराने मित्रों का समागम
इसके कुछ समय बाद अमेरिका से श्री हरमिन्दर सिंह का लखनऊ आगमन हुआ। हमने इस अवसर का उपयोग आपस में पुनः एकत्र होने में किया। श्री आर.के. श्रीवास्तव के निवास पर एक दिन शाम को मिलना निश्चित हुआ। उसमें मैं सपत्नीक सम्मिलित हुआ और एचएएल से अपने पुराने साथी श्री विष्णु कुमार को भी सपत्नीक बुलाया गया। इससे अच्छा खासा गेट-टुगेदर (समागम) हो गया। हरमिन्दर जी की पत्नी (हमारी प्रिय भाभी जी) उस समय अमेरिका में ही थीं। उनके साथ हमारी वीडियो कान्फ्रेंसिंग से भेंट हो गयी। मुझे लम्बे समय बाद उनके दर्शन करके बहुत अच्छा लगा।
इस समागम के कुछ समय बाद सन् 2013 में श्री रवि आनन्द भी अमेरिका से लखनऊ आये। वे मुझसे मिलने मेरे कार्यालय में आये थे। मैंने उनसे अपने निवास पर चलने का बहुत अनुरोध किया, पर पता नहीं क्यों वे घर आने में बहुत संकोच कर रहे थे। इसलिए मैंने भी अधिक जोर नहीं दिया, पर उनसे मिलकर मुझे बहुत अच्छा लगा।
-- डाॅ विजय कुमार सिंघल ‘अंजान’

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